मुझे क्या पता था, कभी इश्क़ में रक़ीबों को कासिद, बनाते नहीं ,
खता हो गई मुझसे, कासिद मेरे ,
तेरे हाथ पैगाम क्यों दे दिया ............... जावेद शाह खजराना
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| javed shah khajrana in choral village |
javed shah khajrana
खुशबू चमन को छोड़ के
सांसों में घुल गई ~~~~~
लहरा के अपने आप जुल्फ खुल गई